NEET में आर्यन और पांशुल के अंक समान होने के बावजूद अलग रैंक क्यों मिली?
NEET परीक्षा में जब दो उम्मीदवारों के अंक एक समान हो जाते हैं, तो रैंक तय करने के लिए सबसे पहले बायोलॉजी के स्कोर की तुलना की जाती है। जिस छात्र के बायोलॉजी में ज्यादा नंबर होते हैं, उसे ऊंची रैंक दी जाती है। अगर बायोलॉजी में भी स्कोर बराबर रहे, तो फिर केमिस्ट्री और उसके बाद फिज़िक्स के अंकों को देखा जाता है। यदि तीनों विषयों में अंक एक समान हों, तो फिर सही और गलत उत्तरों के अनुपात के आधार पर रैंक का फैसला होता है।