IISc का कमाल: दूध के बेकार पैकेटों से तैयार किया फर्नीचर
एक अध्ययन के मुताबिक, रोजाना करीब 10 से 12 करोड़ सिंगल-यूज़ दूध के पैकेट इस्तेमाल होते हैं, जो प्लास्टिक कचरा फैलाने का बड़ा कारण हैं। IISc के वैज्ञानिकों ने इन पैकेटों में मौजूद पॉलीएथिलीन को रीसाइक्लिंग के दौरान पॉलीप्रोपिलीन के पुनर्चक्रित घटकों के साथ मिलाकर एक नया पदार्थ बनाया है। इस तकनीक का उपयोग करके अब शैम्पू की बोतलें और फर्नीचर जैसी चीजें बनाई जा सकती हैं।