135 साल पुराना बैंकिंग साक्ष्य कानून बदला, रिकॉर्ड और प्राइवेसी से जुड़े होंगे 5 बड़े बदलाव
संसद द्वारा 135 वर्ष पुराने बैंकिंग साक्ष्य कानून के स्थान पर नया कानून पारित किया गया है, जिसके तहत डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को अब कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता मिलेगी। इसके अंतर्गत बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति कोर्ट में प्रस्तुत की जा सकेगी, और विशेष परिस्थितियों में पुलिस अदालत के आदेश के बिना भी बैंक खाते का विवरण प्राप्त कर पाएगी। इससे बैंक कर्मियों को बार-बार अदालत के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी, साथ ही इस कानून का दायरा एनबीएफसी (NBFC), बीमा और पेंशन कंपनियों तक भी विस्तृत किया जा सकेगा।