राजकोषीय घाटा क्या है? अप्रैल-मई के आंकड़े क्यों चिंताजनक हैं?

राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार की कुल आय उसके कुल खर्च से कम होती है। इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है। अप्रैल और मई के महीनों में, यह घाटा ₹1.62 लाख करोड़ तक पहुँच गया। यह आंकड़ा पूरे साल के लिए तय किए गए बजटीय लक्ष्य का 9.6% है। जानकारों का कहना है कि राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है और ब्याज दरों पर भी दबाव आ सकता है।

by shortkt.com
18 घंटे पहले