भारत में पारसी समुदाय के अनोखे सरनेम के पीछे की दिलचस्प वजह क्या है?

7वीं सदी में फारस पर अरब-इस्लामी आक्रमण के बाद जब पारसी समुदाय भारत आया, तब उनके बीच सरनेम रखने की परंपरा नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1800 के दशक में जब ब्रिटिश शासन ने उपनाम रखना जरूरी कर दिया, तो पारसियों ने अपने काम, कारोबार या निवास स्थान को ही अपना सरनेम बना लिया। इसी वजह से शराब बेचने वालों को दारूवाला, बोतल का व्यापार करने वालों को बाटलीवाला और पुणे में बसने वालों को पूनावाला जैसे नाम मिले।

by shortkt.com
3 घंटे पहले
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