FCRA में कब-कब हुए बड़े बदलाव? जानिए आपातकाल से अब तक का सफर
भारत में विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के समय 1976 में पेश किया था। इसके बाद 1984 में उन सभी स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) के लिए पंजीकरण कराना जरूरी कर दिया गया जो विदेश से चंदा लेती थीं। साल 2010 में नियमों को और कड़ा करते हुए रजिस्ट्रेशन की अवधि 5 साल तय की गई और नवीनीकरण की प्रक्रिया को कठिन बनाया गया। वहीं, 2020 में संशोधनों के जरिए सब-ग्रांटिंग पर पाबंदी लगा दी गई और प्रशासनिक कार्यों में होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा को 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया।